Sehore: मिलावटखोरी में सीहोर टॉप-10…!

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Sehore News: सीहोर। जिला प्रशासन और खाद्य विभाग की सुस्ती आम जनता की सेहत पर भारी पड़ रही है। मध्य प्रदेश के टॉप-10 मिलावटखोर जिलों की सूची में सीहोर का नौवें स्थान पर आना कोई उपलब्धि नहीं, बल्कि जिले के स्वास्थ्य सुरक्षा तंत्र की विफलता का प्रमाण है। ‘शुद्ध के लिए युद्ध’ जैसे नारों के बीच जिले में 55 फूड सैंपल फेल पाए गए हैं, लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि विभाग उन मिलावटखोरों के नाम सार्वजनिक करने से कतरा रहा है जो लोगों की थाली में धीमा जहर परोस रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की हालिया रिपोर्ट ने जिले में हडक़ंप मचा दिया है। पिछले तीन सालों में लिए गए सैंपल्स की सामूहिक रिपोर्ट बताती है कि (ग्वालियर 420 फेल सैंपल) के बाद प्रदेश के चुनिंदा प्रदूषित जिलों में सीहोर भी शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार हमारे दैनिक आहार का हिस्सा बनने वाले दूध, मावा, पनीर और घी जैसे डेयरी उत्पादों में सबसे ज्यादा मिलावट पाई गई है।
जब मौत के करीब पहुंचे 200 ग्रामीण
मिलावटखोरी का सबसे डरावना चेहरा हाल ही में इछावर तहसील के ग्राम बबडिय़ा नोआबाद में देखने को मिला। एक शादी समारोह में दूषित भोजन करने से 200 से अधिक लोग एक साथ बीमार पड़ गए। पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई और स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला अस्पताल तक अफरा तफरी का माहौल रहा। बुजुर्गों और बच्चों की हालत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें आपातकालीन वार्डों में भर्ती करना पड़ा। बड़ा सवाल यह है कि इस घटना को आठ दिन से ज्यादा हो, लेकिन आज तक जिला खाद्य विभाग यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि उस शादी में सामग्री किस दुकान से आई थी।
नाम बताने में विभाग की ‘मजबूरी’ क्या है?
जिलेवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब विभाग को पता है कि कौन सी दुकान का सैंपल फेल हुआ है तो उन नामों को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता। क्या विभाग मिलावटखोरों को सुधारने का मौका दे रहा है या उन्हें संरक्षण दे रहा है। अगर जनता को पता होगा कि किस मिठाई की दुकान या डेयरी पर नकली पनीर मिल रहा है तो लोग वहां जाने से बचेंगे। नाम छिपाकर विभाग सीधे तौर पर जनता को उन्हीं असुरक्षित दुकानों पर जाने के लिए मजबूर कर रहा है।
सिर्फ खानापूर्ति बनकर रह गई कार्रवाई
सीहोर में खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली केवल त्योहारों के समय सैंपल लेने तक सीमित रह गई है। सैंपल फेल होने के बाद जुर्माना लगाकर फाइलें बंद कर दी जाती हैं। जनता का आरोप है कि विभाग और मिलावटखोरों के बीच एक ऐसी सांठगांठ है, जिसके चलते आम आदमी की जान जोखिम में है।