Sehore News: सीहोर। जिले की राजनीति में आष्टा विधानसभा क्षेत्र का दबदबा एक बार फिर साबित हो गया है। विशेष रूप से अनुसूचित जाति वर्ग की राजनीति के मामले में आष्टा अब जिले का मुख्य केंद्र बनकर उभरा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों ने अपने अनुसूचित जाति विभाग के जिलाध्यक्ष पदों के लिए आष्टा के नेताओं पर भरोसा जताया है।
बता दें जिले में राजनीतिक नियुक्तियों का दौर जारी है। दो दिन पहले ही भाजपा ने कैलाश बगाना को अनुसूचित जाति मोर्चा का जिलाध्यक्ष नियुक्त कर अपनी रणनीति साफ कर दी थी। भाजपा के इस दांव के बाद अब कांग्रेस ने भी पलटवार करते हुए आष्टा पर ही दांव खेला है। कांग्रेस आलाकमान ने आष्टा के घनश्याम जांगड़ा को अनुसूचित जाति विभाग का जिलाध्यक्ष नियुक्त कर उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।
क्यों खास है आष्टा का समीकरण
बता दें जिले में आष्टा ही एकमात्र ऐसी विधानसभा सीट है जो अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित है। यही कारण है कि जिले की एससी राजनीति की धुरी इसी क्षेत्र के इर्द-गिर्द घूमती है। वर्तमान में यहां के विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर हैं, जो पहले कांग्रेस के कद्दावर नेता हुआ करते थे, लेकिन अब भाजपा के टिकट पर विधायक हैं। ऐसे में दोनों दल इस वर्ग को अपने पाले में करने के लिए आष्टा के स्थानीय चेहरों को आगे कर रहे हैं।
महिला मोर्चा की कमान भी आष्टा के पास
दिलचस्प बात यह है कि केवल अनुसूचित जाति मोर्चा ही नहीं, बल्कि महिला राजनीति में भी आष्टा का ही वर्चस्व है। जिले में भाजपा और कांग्रेस दोनों के ही महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष पद भी वर्तमान में आष्टा के ही पास हैं।
आगामी चुनावों की तैयारी…
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल आगामी चुनावों और सामाजिक समीकरणों को देखते हुए आष्टा को नजरअंदाज नहीं करना चाहते। घनश्याम जांगड़ा और कैलाश बगाना दोनों ही अपने-अपने क्षेत्रों में जमीनी पकड़ रखते हैं। सत्ताधारी दल होने के नाते भाजपा कैलाश बगाना के जरिए सरकारी योजनाओं को दलित वर्ग तक पहुंचाकर अपनी पैठ और मजबूत करना चाहती है। इधर कांग्रेस ने घनश्याम जांगड़ा को आगे कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह आरक्षित सीट पर भाजपा को कड़ी टक्कर देने के लिए पूरी तरह से तैयार है।


