सीहोर। शहर में मारवाड़ी परंपरा और लोक संस्कृति का अनूठा पर्व गणगौर बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। माहेश्वरी समाज द्वारा आयोजित 10 दिवसीय इस उत्सव के अंतिम दिन भगवान ईसर जी शिव और माता गोरा जी पार्वती का भव्य चल समारोह निकाला गया। इस दौरान पूरा मार्ग गोर ए गणगौर माता खोल किवाड़ी के गीत गाए गए।
गणगौर का यह पर्व न केवल अखंड सौभाग्य की कामना का प्रतीक है, बल्कि यह पर्यावरण सुरक्षा से भी गहराई से जुड़ा है। माहेश्वरी समाज द्वारा परंपरा का निर्वहन करते हुए भगवान ईसर जी और मां गोरा जी की प्रतिमाओं को बैलगाड़ी पर विराजित कर चल समारोह निकाला गया। यह चल समारोह माहेश्वरी भवन से शुरू होकर शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होता हुआ सीवन नदी के महिला घाट पहुंचा।
सीवन तट पर हुआ पूजन और विसर्जन
चल समारोह में समाज की महिलाएं पूर्ण श्रृंगार कर पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुईं। सीवन नदी के तट पर महिलाओं ने विधि-विधान से माता गणगौर की पूजा-अर्चना की और अपने सुहाग की दीर्घायु व परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके पश्चात प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। विसर्जन के बाद रात्रि में माहेश्वरी भवन पर विशेष आयोजन हुआ, जहां महिलाओं ने पारंपरिक झाले दिए और मंगल गीत गाए।
इस आयोजन में माहेश्वरी समाज की अनेक प्रमुख पदाधिकारी और महिलाएं उपस्थित रहीं। इनमें जिला अध्यक्ष गीता सोडाणी, प्रदेश पदाधिकारी सत्यभामा मंत्री, प्रतिभा झंवर, सरोज झंवर, रजनी बाहेती, शोभा चांडक, आभा मंत्री, आभा कास्ट, ज्योति झंवर और लीला कुइयां प्रमुख रूप से शामिल हुईं। कार्यक्रम को सफल बनाने में महिला मंडल अध्यक्ष संगीता राठी, सचिव अनिता बांगड़, गायत्री साबू, शिवानी कास्ट, रानी तोषनीवाल, निशा मंत्री, बबीता बियानी, रश्मि बाहेती, चंदन कास्ट और प्रिया मुंद्रा सहित समाज की समस्त महिलाओं का विशेष सहयोग रहा।


