सीहोर। जिले में गहराया घरेलू गैस सिलेंडर का संकट अब केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान तक पहुंच गया है। शनिवार को जिला मुख्यालय पहुंचे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने मीडिया ने गैस किल्लत का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। जिले में हालात इतने विकट हैं कि गैस एजेंसियों पर पुलिस के साए में ऑफलाइन नंबर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे जनता के बीच डर और तनाव की स्थिति बनी हुई है।
बता दें जिले में पिछले कई दिनों से रसोई गैस की किल्लत बनी हुई है। आलम यह है कि गैस एजेंसियों पर शनिवार को भी लंबी-लंबी कतारें देखी गईं। ऑनलाइन नंबर नहीं लगने के कारण लोग परेशान हैं, जिसके चलते एजेंसियों पर भारी भीड़ उमड़ रही है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस तैनात करना पड़ी और पुलिस की निगरानी में ही ऑफलाइन नंबर बांटे गए। जिला प्रशासन फिलहाल लोगों के मन से इस संकट का डर दूर करने में नाकाम साबित हो रहा है।
शिवराज का आश्वासन, जल्द सामान्य होगी आपूर्ति
कलेक्ट्रेट परिसर स्थित जिला पंचायत सभागार में आयोजित (दिशा) जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति की बैठक में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस संकट पर संज्ञान लिया। उन्होंने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा देशवासी एलपीजी संकट को लेकर बिल्कुल भी चिंता न करें। भारत सरकार आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास कर रही है। जल्द ही आपूर्ति चैन सुधरेगी और स्थिति सामान्य हो जाएगी।
पट्टा दो पर घर मत तोड़ो
प्रधानमंत्री आवास योजना की समीक्षा के दौरान मंत्री श्री चौहान भावुक नजर आए। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि किसी भी गरीब का घर न तोड़ा जाए। उन्होंने कहा भगवान ने यह धरती सबके लिए बनाई है। यदि किसी गरीब के पास पट्टा नहीं है तो उसे अपात्र न करें, बल्कि उसे पट्टा देने की कोशिश करें।
गर्मी को लेकर चिंतित दिखे शिवराज
बैठक में आगामी गर्मी को लेकर भी चर्चा हुई। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आशंका जताई कि इस साल भीषण गर्मी पड़ सकती है, जिससे पेयजल संकट गहरा सकता है। उन्होंने बीबी रामजी योजना सहित अन्य जल योजनाओं की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रशासन अभी से मुस्तैद रहे ताकि जनता को पानी के लिए न भटकना पड़े।
जनप्रतिनिधियों से रखें तालमेल
शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को दो-टूक कहा कि विकास कार्यों में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बेहतर सामंजस्य होना चाहिए। तालमेल के अभाव में योजनाओं की जमीनी हकीकत का पता नहीं चल पाता, जिससे जनता परेशान होती है।


